पूज्य श्री जितेन्द्री जी महाराज द्वारा जानिए ‘कैसे हुई भगवान विश्वकर्मा की उत्पत्ति…?’ एवं विश्वकर्मा पूजा विधि, महत्व। ……………

‘विश्वकर्मा पूजा’


हर साल विश्वकर्मा पूजा कन्या संक्रांति को मनाई जाती है। बता दें कि इसी दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है। इसलिए इस दिन उद्योगों, फैक्ट्र‍ियों और हर तरह की मशीनों की पूजा की जाती है। इस बार विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर 2020 को गुरुवार के दिन मनाई जाएगी।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही देवताओं के लिए अस्त्रों, शस्त्रों, भवनों और मंदिरों का निर्माण किया था। विश्वकर्मा ने सृष्टि की रचना में भगवान ब्रह्मा की सहायता की थी, ऐसे में अभियांत्रिकी (इंजीनियरिंग) के काम में लगे लोग उनकी पूजा करते हैं। यह पूजा सभी कलाकारों, बुनकर, शिल्पकारों और औद्योगिक घरानों द्वारा की जाती है।

‘कैसे हुई भगवान विश्वकर्मा की उत्पत्ति…?’


कथाओं में माना जाता है की भगवान विष्णु भगवान सागर में शेषशय्या पर प्रकट हुए। कहते हैं कि धर्म की ‘वस्तु’ नामक स्त्री से उत्पन ‘वास्तु’ के सातवें पुत्र थें, जो शिल्पशास्त्र के प्रवर्तक थे। वास्तुदेव की ‘अंगिरसी’ नामक पत्नी से विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। अपने पिता की तरह विश्वकर्मा भी वास्तुकला के अद्वितीय आचार्य बने।

‘विश्वकर्मा पूजा विधि…’


विश्वकर्मा की पूजा करने के लिए सुबह अच्छे कपड़े पहनें और भगवान विश्वकर्मा की पूजा करें। विश्वकर्मा की पूजा में इन चीजों को साथ में लाकर रखें जैसे अक्षत, हल्दी, फूल, पान, लौंग, सुपारी, मिठाई, फल, धूप, दीप, रक्षासूत्र इत्यादि और पूजा शुरु करें। आप जिन चीजों की पूजा करना चाहते हैं उन पर हल्दी और चावल लगाएं। इसके बाद कलश को हल्दी और चावल के साथ रक्षासूत्र चढ़ाएं। तत्पश्चात् पूजा करते समय मंत्रों का उच्चारण करें। जब पूजा समाप्त हो जाए उसके बाद सभी लोगों में प्रसाद का वितरण करें।

‘क्या है पूजा महत्व…?’


विश्वकर्मा की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि उन्हें पहला वास्तुकार माना गया है। मान्यता है कि हर साल अगर आप घर में रखे हुए लोहे और मशीनों की पूजा करते हैं तो वो जल्दी खराब नहीं होते हैं, मशीनें अच्छी चलती हैं क्योंकि भगवान उन पर अपनी कृपा बनाकर रखते हैं। भारत के कई हिस्सों में यह पर्व बेहद धूम धाम से मनाया जाता है।

ll प्रेम से बोलो विश्वकर्मा भगवान की जय हो ll

धन्यवाद।